ऐ सृष्टि मुझसे बचना,मैं ईश्वर की अनुपम रचना।

ऐ सृष्टि मुझसे बचना,
मैं ईश्वर की अनुपम रचना।  

प्रकृति की इस छैया में,
कर्मो की इस नैया में, 
वृक्ष मैं काट डालूँगा,
सवार नाव में छेद करूँगा,
उद्देश्य है एक मात्र मेरा
स्वार्थ का धन जेब मे रखना,

ऐ सृष्टि मुझसे बचना,
मैं ईश्वर की अनुपम रचना।  

निर्भीक नहीं अपने कर्मों से,
दुनिया से भयभीत हूँ,
छल, कपट चोला मेरा,
मैं बस अपना मीत हूँ,
खाने का शौकीन हूँ मैं, 
होश नहीं कैसे पचना,

ऐ सृष्टि मुझसे बचना,
मैं ईश्वर की अनुपम रचना।  

निजहित ही सर्वधर्म मेरा,
परनिंदा ही कर्म मेरा,
पशु पक्षी भक्षण भोजन,
लालसा में भागा योजन,
नशे में धुत खुद को रखना,

ऐ सृष्टि मुझसे बचना,
मैं ईश्वर की अनुपम रचना।  




 

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