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जीवन के नियम

1. जब तक आप जीवन में बसे नहीं हैं, तब तक प्यार में मत पड़ो। 2. लड़कियों को संघर्षरत लड़के से शादी करना पसंद नहीं है। 3. कभी भी अपने पूर्व साथी के साथ दोस्ती न करें। दोस्त अस्थायी L 4. मित्र समय के साथ 'संपर्क' या 'परिचित' बन जाते हैं। 5. कोई भी आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करता है। 6. किसी भी यादृच्छिक व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को साझा न करें। 7. माता-पिता ही सही मायने में आपसे प्यार करते हैं। 8. यदि आप बार-बार असफल होते हैं तो आपके माता-पिता आपका समर्थन करना बंद कर सकते हैं। 9. ऋण पर कार न खरीदें। कभी नहीँ। 10. घर खरीदना अनिवार्य नहीं है। 11. अपने प्रियजनों की मदद करें। 12. जहां आप खुद को बेहतर बना सकते हैं वहां काम करें। 14. यदि आप सुधार करना चाहते हैं, तो आराम की इच्छा न करें। 15. अपने आप में निवेश करें। दिन-ब-दिन बेहतर होने की कोशिश करें। 16. यदि आप खुद में कोई वृद्धि नहीं देखते हैं तो नौकरी छोड़ दें। 17. कम बोलो। और सुनो। 18. अच्छी चीजों या लोगों की सराहना करें। 19. पर्याप्त धन बचाएं। 20. जीवन में पैसा लगभग सब कुछ है। आप बिना पैसे के विकलांग हैं। 21. जब...

मैं आज़ाद देश का आज़ाद नागरिक हूँ।

मेरे घर में जब बेमतलब की लाइटें जलती रहती हैं, पंखा चलता रहता है, टीवी चलता रहता है तब मुझे कोई तकलीफ नहीं होती परन्तु बिजली का दाम  दस पैसे बढ़ते ही मेरी अंतरात्मा कराह उठती है। जब मेरे बच्चे सोलह डिग्री सेंटीग्रेड पर एसी चलाकर कम्बल ओढ़कर सोते हैं तब मैं कुछ नहीं बोल पाता लेकिन बिजली का रेट बढ़ते ही मेरा पारा चढ़ जाता है। जब मेरा गीजर चौबीसों घंटे ऑन रहता है तब मुझे कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन बिजली का रेट बढ़ते ही मेरी खुजली बढ़ जाती है। जब मेरी कामवाली या घरवाली कुकिंग गैस बर्बाद करती है तब मेरी जुबान नहीं हिलती लेकिन गैस  का दाम बढ़ते ही मेरी ज़ुबान कैंची हो जाती है। रेड लाइट पर कार का इंजन बन्द करना मुझे गँवारा नहीं, घर से दो गली दूर दूध लेने मैं गाड़ी से जाता हूँ, वीकेंड में मैं बेमतलब भी दस बीस किलोमीटर गाड़ी चला लेता हूँ लेकिन अगर पेट्रोल का दाम एक रूपया बढ़ जाए तो मुझे मिर्ची लग जाती है। एक रात दो हज़ार का डिनर खाने में मुझे तकलीफ नहीं होती लेकिन बीस- पचास रुपए की पार्किंग फीस मुझे बहुत चुभती है। मॉल में दस हज़ार की शॉपिंग पर मैं एक रूपया भी नहीं छुड़ा पाता लेकिन हरी सब्जी के ठेले ...

कोरोनिल- आयुर्वेदिक औषधि विश्लेषण

हाल ही में पतंजलि आयुर्वेद ने कोरोनिल नामक दवा को कोरोना का उपचार करने के लिए बनाया है। कोरोनिल की सम्पूर्ण अनुसंधान आपकी जानकारी हेतु प्रेषित है ।  कोरोनिल के क्लीनिकल ट्रायल किये गए जिसके परिणाम ये थे कि 69% लोग 3 दिन में  औऱ 100% लोग 7 दिन में कोरोना से ठीक (रिकवर)हो गए। और साथ ही आने वाले दिनों में पतंजलि आयुर्वेद औपचारिक तौर पर RELEASE EVIDENCE DATA प्रकाशित करेगी।  कोरोनिल का research/ अनुसंधान अमेरिका की Biomedicine Pharmacotherapy International Journal में प्रकाशित किया जा चुका है और DGCDI (Director General Controller of Drug in India) ने प्रमाणित किया है।  कोरोनिल अश्वगंधा, तुलसी, गिलोय, श्वासरी और अणु तेल से बनाया गया है जिसमे प्रत्येक content का विश्लेषण दिया जा रहा है: 1) अश्वगंधा - ये RBD (RNA Binding Domain) और ACE (Angiotensin Converting Enzyme) के परस्पर प्रतिक्रिया को रोकता है जिससे संक्रमण समाप्त हो जाता है।  2) तुलसी - तुलसी RNA POLYMERASE को रोक देता है जिससे संक्रमण और virus का विकास रुकता है ।  3) श्वासरी - फेफड़ो में गाढ़े म्यूकस या बलग...

मिसिंग टाइल सिंड्रोम

मिसिंग टाइल सिंड्रोम मिसिंग टाइल सिंड्रोम एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जिसमें हमारा सारा ध्यान जीवन की उस कमी की तरफ रहता है जिसे हम नहीं पा सके हैं | और यहीं बात हमारी ख़ुशी चुराने का सबसे बड़ा कारण है। जिन्दगी में कितना कुछ भी अच्छा हो, हम उन्हीं चीजों को देखते हैं जो मिसिंग हैं और यही हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण है। क्या इस एक आदत को बदल कर हम अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं ? मिसिंग टाइल सिंड्रोम  एक बार की बात है एक छोटे शहर में एक मशहूर होटल  ने अपने होटल में एक स्विमिंग पूल बनवाया। स्विमिंग पूल के चारों  ओर बेहतरीन इटैलियन  टाइल्स लगवाये, परन्तु मिस्त्री से एक स्थान पर टाइल  लगना छूट गया। अब जो भी आता पहले उसका ध्यान टाइल्स  की खूबसूरती पर  जाता। इतने बेहतरीन टाइल्स देख कर हर आने वाला मुग्ध हो जाता। वो बड़ी ही बारीकी से उन टाइल्स को देखता व प्रशंसा करता। तभी उसकी नज़र उस मिसिंग टाइल पर जाती और वहीं अटक जाती.... उसके बाद वो किसी भी अन्य टाइल की ख़ूबसूरती नहीं देख पाता। स्विमिंग पूल से लौटने वाले हर व्यक्ति की यही शिकायत रहती की एक टाइल मिसिंग है। हजार...

कलारीपयट्टू - भारतीय मार्शल आर्ट

कलारीपयट्टू - भारतीय मार्शल आर्ट कलारी पयट्टू एक बेहद प्राचीन कला है। पारंपरिक तौर पर माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति स्वयं भगवान द्वारा की गई है। लेकिन भारतीय संस्कृति के कई अन्य आयामों की तरह यह असाधारण मार्शल आर्ट भी किसी और की नहीं, बल्कि अगस्त्य मुनि की देन है। कलारी शायद इस धरती की सबसे प्राचीनतम सामरिक कला व मार्शल आर्ट है। मूलरूप से अगस्त्य मुनि ने यह मार्शल आर्ट सिखाई थी।  शुरुआती दौर में इसका मतलब सिर्फ लात चलाना, घूंसा मारना या छुरा प्रहार करना भर नहीं था, बल्कि इस कला में अपने शरीर का हर प्रकार से उपयोग करना शामिल था। यह कला सिर्फ व्यायाम और शारीरिक चुस्ती फुर्ती तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें अपने शरीर के ऊर्जा व्यवस्था को अच्छी तरह समझना भी शामिल था। इसी का एक हिस्सा कलारी चिकित्सा और कलारी मर्म भी होता है, जिसमें शरीर के तमाम रहस्यों और शारीरिक उपचार की जानकारी भी शामिल होती है, जिससे शरीर को तुरंत ऊर्जावान बनाकर खड़ा किया जा सकता है। हो सकता है कि आज के दौर में कलारी के बहुत कम सच्चे साधक बचे हैं, जो अपना समय, ऊर्जा और ध्यान पूर्ण ...

ऐ सृष्टि मुझसे बचना,मैं ईश्वर की अनुपम रचना।

ऐ सृष्टि मुझसे बचना, मैं ईश्वर की अनुपम रचना।   प्रकृति की इस छैया में, कर्मो की इस नैया में,  वृक्ष मैं काट डालूँगा, सवार नाव में छेद करूँगा, उद्देश्य है एक मात्र मेरा स्वार्थ का धन जेब मे रखना, ऐ सृष्टि मुझसे बचना, मैं ईश्वर की अनुपम रचना।   निर्भीक नहीं अपने कर्मों से, दुनिया से भयभीत हूँ, छल, कपट चोला मेरा, मैं बस अपना मीत हूँ, खाने का शौकीन हूँ मैं,  होश नहीं कैसे पचना, ऐ सृष्टि मुझसे बचना, मैं ईश्वर की अनुपम रचना।   निजहित ही सर्वधर्म मेरा, परनिंदा ही कर्म मेरा, पशु पक्षी भक्षण भोजन, लालसा में भागा योजन, नशे में धुत खुद को रखना, ऐ सृष्टि मुझसे बचना, मैं ईश्वर की अनुपम रचना।